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तकनीक करेगी फैसले तो विज्ञापन किसे लुभाएंगे?

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भविष्य के विज्ञापनों के बारे में दिलचस्प खबरें उड़ रही हैं। जैसे यह कि भविष्य के विज्ञापन विज्ञापनों जैसे नहीं दिखेंगे। या फिर यह कि विज्ञापनों का भविष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के रहमो-करम पर होगा, या तब के विज्ञापन हमारे समझने लायक भाषा में नहीं होंगे। क्या झमेला है यह सब? विज्ञापनों के क्षेत्र में बदलाव तो खासा हुआ है। दुनिया के 25 फीसदी विज्ञापन देखते ही देखते सिर्फ गूगल और फेसबुक के हाथ में आ चुके हैं। सारी दुनिया के अखबारों में छपने वाले विज्ञापन एक तरफ और इन दो डिजिटल संस्थानों को मिलने वाले विज्ञापन एक तरफ। आपको और हमें अहसास होने से पहले ही अचानक डिजिटल और तकनीकी माध्यम इतना बड़ा बन गया है। बदलाव का यह सिलसिला चलता रहेगा और तकनीक के बदलने की रफ्तार अभी और बढ़ेगी। सो आने वाले पच्चीस-तीस सालों में आप और हम उस तरह के विज्ञापन नहीं देख रहे होंगे जैसे कि आज देखते हैं। न ही हम विज्ञापनों से प्रभावित हो रहे होंगे। क्योंकि असल में हम विज्ञापन देख ही नहीं रहे होंगे और अगर कोई विज्ञापनों को देख रही होगी तो वह होगी तकनीक जो हमारी तरफ से फैसले करने में सक्षम होगी। जी हाँ, स्वागत है आपका...